युवाओं द्वारा ही भ्रष्टाचार का दमन - निबंध essay Hindi

Essay hindi bhrashtachar

बुरा जो देखन मैं चला बुरा मिला न कोय 
 जो मन देखहुँ आपनों मुझ से बुरा न कोय। 

यह पंक्तियाँ वास्तव में भष्ट्राचार के जाल को समझा सकती हैं। आज हर व्यक्ति चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है! कि हमारी शासन प्रणाली, नौकरशाही, शिक्षा तंत्र यहाँ तक कि हमारी न्याय प्रणाली भ्रष्ट है! 

परन्तु वास्तव में भ्रष्टाचार कोई इतनी छोटी चीज या समस्या नहीं है, जिसे इन्हीं अंगों को ग्रसित बताया जाय । 

वास्तव में आज हम और हमारे आस-पास का हर व्यक्ति ही जाने अनजाने में भ्रष्टाचार का कारण बन रहा है। आएँ पहले समझते हैं कि आखिरकर यह भ्रष्टाचार है क्या ?

भ्रष्टाचार शब्द अंग्रजी भाषा के corrupt शब्द से बना है। भ्रष्टाचार शब्द को ध्यान से समझे तो किसी भी प्रणाली को किसी भी प्रकार से नुकसान पहुँचाना भ्रष्टाचार है। 

यह रिश्वत देकर खुद को आगे करना या रिश्वत लेना या किसी कार्य की गुणवत्ता को ध्यान में न रखकर उस कार्य को करना जिससे देश, परिवार या समाज का नुकसान हो। 

वास्तव में भ्रष्टाचार कोई एसी समस्या नहीं है जो नई-नई बीमारी हो। यह तो हमेशा प्रशासन में छिपी हुई थी, परन्तु दिखाई नहीं देती थी! 

क्योंकि अच्छे कार्यकर्ताओं व कर्मियों के द्वारा वह ढ़क दी जाती थी। धीरे-धीरे ऐसे लोग बढ़ते गए जो अपने स्वार्थ के लिए कोई भी गलत काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। 

इस प्रकार समय के साथ-साथ इस पर ध्यान नहीं दिया गया और इसने एक महामारी की तरह पूरे देश को जकड़ लिया।

2011 की जनगणना के अनुसार भारत की 60% के करीब जनसंख्या की उम्र 50 वर्ष के आस-पास है। इतनी बड़ी जनसंख्या जो कि वास्तव में देश की GDP growth में सक्रिय रूप से जुड़ रही है! 

अगर चाहते तो वास्तव में कुछ ही सालों में भ्रष्टाचार को खत्म तो नहीं परंतु खत्म होने के करीब लाया जा सकता है। भ्रष्टाचार का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावी स्रोत है हमारी राजनीति। 

आज राजनीति में अच्छे लोग का आना ही नहीं पसंद करते। अगर कोई अच्छा व्यक्ति आ भी जाता है तो ऊपर के लोग अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर उसे कमजोर बनाने की कोशिश करते हैं, या फिर माहौल देखकर वह भी उसी प्रकार खराब राजनीति का हिस्सा बन जाता है। 

हमारे युवा, जो कि इतनी ज्यादा संख्या में है, वे चाहें तो किसी एक अच्छे इंसान, अच्छे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति को अपने बीच से खड़ा कर अच्छे जन प्रतिनिधि को ऊपर संसद व विधानमण्डल में भेज सकते हैं। 

अभी कुछ समय पहले हमने देखा की संसद में 3 सेकण्ड में 2 विधेयक पारित कर दिये गए। हमारी संसद ने दुनियाँ में इस मामले में रिकार्ड बना दिया। 

जब किसी संसद में ऐसे निष्क्रिय व प्रष्ट लोग पहुँचेंगे तो वे विधेयक पर चर्चा करेंगे नहीं क्योंकि इसके लिए उन्हें गृहकार्य करना पड़ेगा और वो हंगामा करेंगे। 

युवा सांसद या विधायक इन सभी समस्याओं दूर कर सकते हैं। युवाओं में उम्र कम होने के कारण जोश होता है और वह किसी भी विकास कार्य को ज्यादा को तेजी से कर व करवा सकते हैं। 

जबकि हमारे ज्यादातर- मंत्री, विधायक, सांसद आधे सत्र में बीमार रहते हैं या अन्य समस्याओं के कारण अवकाश ले लेते हैं। आज के युवा अधिक शिक्षित व जागरुक हैं।

आज सूचना का अधिकार जैसे कानून का आसनी से कोई भी देशवासी उपयोग कर सकता है और अपने से जुड़े किसी भी विभाग, ऑफिस, पंचायत, निगम के बारे में उपयोगी जानकारी ले सकता है। 

इस मामले में युवाओं की अधिक उपयोगिता हो सकती है। हाल ही में कई घोटाले commonwealth games scandal coalgate NRHM, 2G Spectrum आदि के खुलासे में RTI का बहुत बड़ा योगदान रहा। इस अधिकार से ही भ्रष्टाचारियों में एक डर उत्पन्न हो गया। 

लोकायुक्त का भी इसके निवारण में अहम योगदान देखा गया है, जैसे - गोवा, ऑध्र प्रदेश की खदानों में।। आज के युवा इंटरनेट का बहुत तेजी से उपयोग कर रहें है। जिससे ज्ञान का प्रसार तेजी से हो रहा है! 

और लोगों तक सूचनाएँ पहुँच पा रही हैं जिससे उनके आपसी विचारों को समझने में एक दूसरे को आसानी होती है। लीबिया में गद्दाफी के शासनतंत्र का खात्मा भी सूचना क्रांति का एक बहुत ही अच्छा उदाहरण है। 

मिस्र में तहरीर चौक पर प्रदर्शन हो या Occupy wall street हो सभी में Internet की बहुत बड़ी भूमिका रही है। इन सब घटनाओं का इन देशों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा। रूस में राष्ट्रपति चुनाव का विरोध एक इंटरनेट वीडियों के कारण किए जाने से यह समझा जा सकता है! कि युवा एक महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरा है। 

हाल फिलहाल भारत में अन्ना हजारे के समर्थन में भारत के युवाओं का दिल्ली के रामलीला मैदान में जो जोश देखने को मिला एवं भारत के हर शहर-कोने से जो समर्थन मिला उसने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया। इन उदाहरणों से समझा जा सकता है! 

कि युवा भ्रष्टाचार मिटाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हम एक छोटा सा उदाहरण ले सकते हैं कि अधिकतर सरकारी नौकरी में युवा ही पहुँचते हैं। अगर वे युवा दृढ़ संकल्पित हों और अपने कार्य को पूरी ईमानदारी से करें! 

तो भ्रष्टाचार पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। आम आदमी को भी धैर्य रखना चाहिए कि अगर किसी कार्य को क्रम से किया जा रहा है तो वह अपनी बारी का इंतजार करे। न कि घूस देकर पहले अपने काम को पूरा करे। 

क्योंकि घूस बड़ा अपराध है। आखिर क्यों देश को अन्ना, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी व प्रशांत भूषण की जरूरत होती है। इसका कारण केवल यही है कि लोगों में संकल्प की कमी है। 

अगर आज के युवा संकल्प ले लें तो यह आसानी से समाप्त हो सकता है। युवाओं से भी यही अपेक्षा की जाती है! कि वे लोकतंत्र व संविधान में विश्वास रखें व धैर्य रखकर अच्छे व्यक्ति का चुनाव करें।

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- लेखक : पंकज कुमार गुप्ता बी. एड.