आर्थिक प्रणाली की परिभाषा, लक्षण समस्या और उसका उपाय

Meaning and Definitions of Economic System
 (Meaning and Definitions of Economic System) 


प्रश्न 1. आर्थिक प्रणाली से क्या आशय है ? आर्थिक प्रणाली के लक्षण, समस्याएं और उनका निदान बताइए। आर्थिक प्रणाली का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Economic System) 

जिस व्यवस्था के अन्तर्गत अर्थव्यवस्था सम्बन्धी सभी निर्णय लिए जाते हैं, वह आर्थिक प्रणाली कहलाती है। ये निर्णय अग्र प्रकार के हो सकते हैं जैसे - किन-किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है ? उत्पादन कैसे किया जाता है तथा उत्पादित माल का वितरण कैसे होना है ? आदि । 

प्रत्येक प्रकार की अर्थव्यवस्था में उत्पादन, उपभोग एवं वितरण आदि इन्हीं निर्णयों के आधार पर निर्भर करते हैं। 

आर्थिक प्रणाली का अर्थ दो प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है - संकुचित अर्थ में, आर्थिक प्रणाली का सम्बन्ध उत्पादन एवं उत्पादन की विधियों से होता है। उत्पादन की विधियाँ मुख्यतः उत्क्पादन के तकनीकी पक्ष से सम्बन्धित होती हैं, जबकि उत्पादन के साधनों के अन्तर्गत यह देखने को मिलता है कि उक्पादन के साधनों पर किसका नियन्त्रण है और ये कैसे उक्पादन के लिए इन साधनों के साथ श्रम का संयोजन करते हैं। 

विस्तृत अर्थ में, आर्थिक प्रणाली में उत्पादन की विधि और साधनों के अतिरिक्त आर्थिक संगठनों को भी शामिल किया जाता है। आर्थिक प्रणाली को परिभाषित करते हुए कुछ प्रमुख विद्वानों ने लिखा है कि . 

 "किसी भी स्थिति में अर्थव्यवस्था की कल्पना उपभोक्ता की आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए उत्पादकों के सहयोग के रूप में अथवा पारस्परिक विनिमय की व्यवस्था के रूप में कर सकते हैं। प्रो. जे. आर. हिक्स 

“एक आर्थिक प्रणाली जटिल मानव सम्बन्धों, जो वस्तुओं तथा सेवाओं की विभिन्न निजी तथा . सार्वजनिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने के उद्देश्यों से सीमित साधनों के प्रयोग से सम्बन्धित है, को प्रकट करने का एक प्रतिमान (Model) है।' 
- एम. गौटलिव

"अर्थव्यवस्था एक ऐसी पद्धति है, जिसके द्वारा लोग जीविका प्राप्त करते हैं।'- प्रो. ए. जे. ब्राउन 

 आर्थिक प्रणाली के लक्षण 

 (Features of Economic System) 


आर्थिक प्रणाली के  प्रमुख लक्षण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं - 

1. व्यक्तियों का समूह : आर्थिक प्रणाली व्यक्तियों का समूह है, जो अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रोजगार की आवश्यकता अनुभव करते हैं और उत्पादन का संचालन करते हैं। 

2. उत्पादन प्रक्रिया : आर्थिक प्रणाली में वस्तुओं एवं सेवाओं की उत्पादन प्रक्रिया निरन्तर रूप से चालू रहती है। उत्पादित वस्तुएँ उपभोग के काम आती हैं अथवा पुनः उत्पादन में प्रयोग होती हैं। 

3. विनिमय प्रक्रिया : आर्थिक प्रणाली में विनिमय प्रक्रिया द्वारा उत्पादित वस्तुओं को उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाता है। 

4. मौलिक समस्याएँ : प्रत्येक प्रकार की आर्थिक प्रणाली में मौलिक समस्याएँ एक ही प्रकार की होती हैं।

5. अधिकतम आर्थिक कल्याण : आर्थिक प्रणाली के अन्तर्गत वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन किया जाता है, जिससे निजी एवं सार्वजनिक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि हो सके। 

(6) नीतियाँ : विभिन्न आर्थिक प्रणालियों के अन्तर्गत अपनी समस्याओं के समाधान हेतु भिन्न-भिन्न प्रकार की नीतियाँ प्रयोग की जाती है।

आर्थिक प्रणाली की केन्द्रीय समस्यायें क्या हैं, अर्थव्यवस्था की आधारभूत समस्याएँ 
(Basic Problems of an Economic)


अर्थव्यवस्था की आधारभूत समस्याएँ निम्नलिखित है।

(1) किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए ? : किसी भी प्रकार की अर्थव्यवस्था में भले ही कितने साधन उपलब्ध हों, किन्तु वे सभी आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने के लिए पर्याप्त न होंगे। वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन उपभोक्ताओं की माँग के अनुसार तय होता है। 

वस्तुओं एवं सेवाओं को प्राप्त करने में भुगतान की गई राशि उत्पादक को प्राप्त होती है, जिसका व्यय वे अपने विभिन्न कार्यों, जैसे - वेतन, मजदूरी एवं किराया आदि से करते हैं। उदाहरण के लिए : अधिकांश भारतवासियों के समक्ष आवास की समस्या है, हाँ तक कि कुछ लोगों के पास तो वस्तु और खाद्यान्न भी उपलब्ध नहीं है। 

अनेकों लोग अपनी वकताओं के अनुरूप वस्तुएं चाहते हैं, किन्तु साधनों के अभाव में उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो ॥ है। इस स्थिति में इस बात की समस्या उत्पन्न हो जाती है कि किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए ? 

आर्थिक प्रणाली का सर्वप्रथम कार्य इस बात का निर्णय लेना है कि उसके स्वयं के पास उपलब्ध साधनों स किन वस्तुओं का और कितनी मात्रा में उत्पादन किया जाए ? प्रत्येक आर्थिक प्रणाली साधनों की सीमितता एवं आवश्यकताओं की अधिकता के कारण निर्णय लेने से पूर्व उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखती है। 

इस समस्या के लिए आर्थिक प्रणाली को यह निर्णय लेना होता है कि - वस्तुओं का किया जाए या उपभोक्ता वस्तुओं का, 

(i) उत्पादन पूँजीगत सैन्य सामान की की जाए या उपभोक्ता वस्तुओं की, 
(ii) पूर्ति 
(iii) उत्पादन वर्तमान के लिए किया जाए या भविष्य के लिए। 

आर्थिक प्रणाली द्वारा आवश्यकताओं एवं साधनों की उपलब्धता के आधार पर उत्पादन का निर्णय लेने पर दूसरी महत्वपूर्ण समस्या इस बात की उत्पन्न होती है कि उत्पादन कितनी मात्रा में किया जाए। को इस समस्या के समाधान हेतु निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना होगा -
(i) माँग के प्रकार,
(ii) साधनों की उपलब्धता, 
(iii) सामाजिक वरीयता, 
(iv) उत्पादन तकनीक।  

(2) उत्पादन किस ढंग से किया जाना चाहिए ? : एक आर्थिक प्रणाली द्वारा उत्पादन की रचना एवं मात्रा का निर्धारण कर लेने के पश्चात एक समस्या यह उत्पन्न होती है कि निर्धारित मात्रा का उत्पादन किस प्रकार किया जाए अथवा उत्पादन संगठन क्या हो ? वस्तुओं का उत्पादन अनेक ढंगों या प्रकारों से किया जा सकता है।
 
उदाहरणार्थ, कृषि करने का एक ढंग यह है कि खेत का आकार काफी बड़ा हो और उसमें थोड़ी सी पूँजी लगा कर उत्पादन किया जाए। दूसरा ढंग यह है कि इतने ही उत्पादन के लिए खेत का आकार छोटा हो किन्तु अच्छी किस्म के बीजों, उर्वरकों एवं जल का प्रयोग भारी मात्रा में किया जाए। उत्पादन का प्रथम ढंग भूमि प्रधान और दूसरा पूँजी प्रधान है। 

किसी अर्थव्यवस्था में किस समय किस नीति का प्रयोग किया जाएगा यह साधनों की उपलब्धता एवं उनके सापेक्षिक मूल्यों पर निर्भर करता है। ठीक इसी प्रकार उद्योगों में भी उत्पादन के लिए श्रम प्रधान और पूँजी प्रधान तकनीकों में से चयन करना पड़ता है। 

सामान्यतः अल्पविकसित देश में श्रम का बाहुल्य पाया जाता है जिसके कारण मजदूरी की दरें नीची होती हैं। इस स्थिति में श्रम प्रधान नीतियों का ही चयन किया जाता है। वस्तुओं का उत्पादन विभिन्न उत्पादकों के मध्य होने वाली प्रतिस्पर्धा के आधार पर होगा। उत्पादन की सबसे अधिक कुशल विधि अपनायी जानी चाहिए जो कीमत प्रतिस्पर्धा का सामना करने एवं अधिकतम लाभ कमाने के लिये सर्वोत्तम होती है। 

(3) उत्पादन किसके लिए किया जाए ? : प्रत्येक समाज के व्यक्तियों की काफी आवश्यकताएँ एक जैसी होती हैं लेकिन फिर भी उनकी किस्मों तथा मात्राओं के विषय में उसकी प्राथमिकता पायी जाती है। इसके साथ ही साथ आर्थिक प्रणाली में व्यक्ति की भूमिका उसके वर्ग और आय सीमा के स्तर का भी निर्धारण करती है जो अन्ततः उनकी माँग को प्रभावित करती है। 

प्रत्येक आर्थिक प्रणाली को इस बात का निर्धारण करना होता है कि कुल उत्पादन का वितरण किस प्रकार किया जाए। आर्थिक प्रणाली को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि वितरण कुशल और न्याययुक्त हो। इस समस्या का समाधान आर्थिक प्रणाली द्वारा ही किया जाता है। 

(4) पूर्ण रोजगार के स्तर की स्थापना किस प्रकार हो ? : आज के मानव की आवश्यकताएँ अनन्त हैं जबकि उत्पादन के साधन सीमित हैं तथा उपलब्ध साधनों का भी समुचित प्रयोग नहीं हो पाता है। श्रम उत्पादन का एकमात्र सक्रिय साधन होने के बावजूद भी काफी लोग बेरोजगार रहते हैं, ऐसा नहीं है कि ये लोग काम नहीं करना चाहते हैं और यह भी सत्य नहीं है कि वे अयोग्य रहते हैं। इसी प्रकार देश के अनेकों कारखानों में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि उनमें उत्पादन क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद भी उनको पूर्ण क्षमता पर नहीं चलाया जा सकता है। 

(5) अल्पकाल में राशनिंग किस प्रकार होनी चाहिए ? : आर्थिक प्रणाली के समक्ष राशनिंग की समस्या उस समय उत्पन्न होती है जब अल्पकाल में माँग और पूर्ति में असन्तुलन उक्पन्न हो जाता है | माँग के पूर्ति से अधिक हो जाने की स्थिति में राशनिंग द्वारा सीमित पूर्ति को इस प्रकार आवंटित किया जाता है कि सभी को वस्तुएँ उपलब्ध हो सकें। 

(6) आर्थिक अनुरक्षण, विकास एवं लोच : आर्थिक अनुरक्षण, विकास एवं लोच का एक आर्थिक प्रणाली के कार्यों में महत्वपूर्ण स्थान है। इसका प्रमुख उद्देश्य वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी उत्पादन क्षमता को बनाए रखना है। अनुरक्षण का तात्पर्य उत्पादन क्षमता को बनाए रखने से है। इसमें पर्याप्त लोच की आवश्यकता भी है, जिससे कि आर्थिक क्रियाओं में समायोजन किया जा सके। 

(7) साधनों के उपयोग और उत्पादन के वितरण में कुशलता किस प्रकार प्राप्त हो : आर्थिक प्रणाली में साधनों के सीमित होने पर उनका उपयोग कुशलतापूर्वक किया जाना चाहिए। इस समस्या का सामना भी सभी अर्थव्यवस्थाओं को ही करना होता है। 

इस समस्या के निम्नलिखित दो पक्ष हैं - साधनों का आवंटन विभिन्न उत्पादन कार्यों के मध्य कुशलता स्थापित करना तथा उद्योग विशेष को साधन आवंटित हो जाने के पश्चात् उनसे अधिकतम उत्पादन प्राप्त करना। 

"उत्पादन के साधनों का आवंटन उस समय अकुशल माना जाता है जब किसी उद्योग से साधन हटाकर दूसरे उद्योग में लगा देने पर जहाँ से साधन हटाए गए हैं उत्पादन में कमी न हो और जहाँ पर सभी साधन उपयोग में लिए, जाएंगे वहाँ उत्पादन में वृद्धि हो जाए।' 

अन्य स्थिति में साधनों का आवंटन कुशल है अथवा नहीं यह पेरेटो के सिद्धान्त के अनुसार कह सकना कठिन होगा। वर्तमान समय में आर्थिक प्रणाली का एक महत्वपूर्ण कार्य राष्ट्रीय आय वितरण में कुशलता लाना और उत्पादन के साधनों के आवंटन को माना जाता है। उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक आर्थिक प्रणाली में उक्त कार्यों का सम्पादन आवश्यक होता है। 

अर्थव्यवस्था की आधारभूत समस्याओं का समाधान

 (Solution of Basic Problems of an Economy through Price Mechanism)

A. कीमत यांत्रिकी द्वारा अर्थव्यवस्था की आधारभूत समस्याओं का समाधान, (solutions of basic problem of an economy thoughts price mechanism)

सभी आधारभूत समस्याओं को कीमत यान्त्रिकी द्वारा हल किया जाता है। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में कीमत संयन्त्र निम्नलिखित तरीके से आधारभूत समस्याओं को हल करता है -

1. क्या उत्पादन किया जाय की समस्या का हल (Solution of Problem of 'What to Produce') - उत्पादकों को उपभोक्ता की पसन्द एवं माँग के अनुसार माल व सेवाओं का उत्पादन करना चाहिए। 
 
2. कैसे उत्पादन किया जाय की समस्या का समाधान (Solution of Problem of 'How to Produce') - उत्पादन की लागत को न्यूनतम किया जाना चाहिए। उत्पादकों को संसाधनों एवं तकनीकी का ऐसा संयोग अपनाना चाहिए जो उत्पादन लागत को न्यूनतम करता हो। 

3. 'किसके लिए उत्पादन किया जाय' की समस्या का समाधान (Solution of Problem for Whom to Produce) - माल एवं सेवाओं का उत्पादन उन उपभोक्ताओं हेतु किया जाना चाहिए जो भुगतान कर सकते हों। प्रभावी माँग कीमत यान्त्रिकी पर निर्भर करती है। 

4. संसाधनों का समुचित उपयोग (Proper Utilisation of Resources) - कीमत यान्त्रिकी के माध्यम से संसाधनों का प्रभावशाली उपयोग किया जाना चाहिए। 

 (b) विधियाँ जिनके माध्यम से समाजवाद में एक अर्थव्यवस्था की आधारभूत समस्याएँ नियोजन हल करता है (The Ways through which Planning Solves Basic Problems of an Economy in Socialism) 

समाजवाद में सभी आधारभूत समस्याएँ आर्थिक नियोजन द्वारा हल की जाती हैं। समाजवाद के अन्तर्गत सरकार द्वारा एक केन्द्रीय नियोजन प्राधिकारी की नियुक्ति की जाती है। यह प्राधिकारी निर्णय लेता है तथा योजनाएँ बनाता है। 

 1. क्या उत्पादन किया जाय? (What to Produce?) - उत्पादित किये जाने वाले माल एवं सेवाओं के प्रकार एवं मात्रा का निर्णय केन्द्रीय नियोजन प्राधिकारी द्वारा किया जाता है। निर्णय लेते समय यह प्राधिकारी समाज कल्याण को ध्यान में रखता है। प्रतिरक्षा माल को उपभोक्ता माल पर वरीयता दी जाती है।

 2. कैसे उत्पादन किया जाय? (How to Produce ?) - यह निर्णय भी केन्द्रीय नियोजन प्राधिकारी द्वारा लिया जाता है। निर्णय लेते समय उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखा जाता है।

 3. किसके लिए उत्पादन किया जाय ? (For Whom to Produce ?) - वस्तुओं व सेवाओं का वितरण लोगों की आवश्यकताओं के अनुसार किया जाना चाहिए।

 4. आर्थिक विकास (Economic Development) - योजनाएँ तीव्र एवं सन्तुलित आर्थिक विकास हेतु बनायी जाती हैं। सभी उपलब्ध संसाधन सर्वाधिक प्रभावी रूप में उपयोग किये जाते हैं। पेरेटो के अनुसार, "राष्ट्रीय आय का वितरण भी कुशलतापूर्वक होना चाहिए।'