चाणक्य नीति और चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ 30 अनमोल विचार!

Acharya Chanakya विष्णु गुप्त व कौटिल्य के नाम से Famous हैं! Chanakya का जन्म बौद्ध धर्म के अनुसार लगभग 400 ईसा पूर्व Taxshila के कुटिल नामक एक ब्राह्मण वंश में हुआ था! chanakya महान विद्वान थे! यह मौर्य वंश के महान सम्राट Chandragupt Maurya के महामंत्री थे! वह कौटिल्य नाम से प्रसिद्ध थे! Economics, Politics, Social policy में चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान है!

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दोस्तों आचार्य चाणक्य ने कुछ ऐसी परिस्थितियों का वर्णन किया है। जिनमें यदि व्यक्ति फैसला ले लेता है तो वह पूर्णता बर्बाद हो जाता है! दोस्तों आचार्य चाणक्य द्वारा इन परिस्थितियों का वर्णन किया है इन परिस्थितियों में व्यक्ति हो फैसला नहीं लेना चाहिए दोस्तों जानते हैं।

उन परिस्थितियों के बारे में जो Chanakya द्वारा बताई गई हैं! तो चलिए दोस्तों जाने उन परिस्थितियों के बारे में जान लेते हैं।

गुस्से में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए!

दोस्तों गुस्से में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए! Acharya Chanakya कहते हैं, की यदि व्यक्ति गुस्से में कोई फैसला लेता है! तो वह सही की जगह गलत निर्णय कर बैठता है।

जिससे वह व्यक्ति को बाद में पछताना पड़ता है दोस्तों अक्सर लोगों को गुस्सा आता है और आपने देखा होगा की गुस्से में वह अच्छे कार्य को भी खराब कर देते हैं! और कार्य विफल हो जाता है इसीलिए दोस्तों गुस्से में फैसला नहीं लेना चाहिए।

जल्दबाजी में!

दोस्तों आज के समय में व्यक्ति जल्दबाजी कोई भी फैसला क्यों ना हो कर बैठता है जल्दबाजी में फैसला करने की बजाय से बह जाती गलत फैसला कर बैठता है।

 इसीलिए Acharya Chanakya कहते हैं कि कोई भी फैसला लेने से पहले उसके बारे में 100 बार सोचना चाहिए और जल्दबाजी में फैसला प लेने से बचना चाहिए।

गंभीर परिस्थिति में !

दोस्तों Acharya Chanakya के अनुसार गंभीर परिस्थितियों में भी फैसला नहीं लेना चाहिए गंभीर परिस्थितियों में मनुष्य का मानसिक संतुलन ठीक नहीं होता है।

और इसकी वजह से वह जिस फैसले को लेता है वह फैसला उसके विपरीत हो जाता है जिससे उसको बहुत नुकसान उठाना पड़ता है कभी भी ऐसी स्थिति में फैसला नहीं देना चाहिए।

दोस्तों महान विद्वान Acharya Chanakya ने अपने कई अध्ययनों में ऐसी बातें कहीं हैं जिनका पालन करके आप अपने सफल जिंदगी जी सकते हैं और बड़ी से बड़ी मुसीबत से सामना कर सकते हैं।

आचार्य चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ 30 अनमोल विचार :- 

QUOTES #1
यदि माता दुष्ट है तो उसे भी त्याग देना चाहिए। 

QUOTES #2
यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए।

QUOTES #3
सांप को दूध पिलाने से विष ही बढ़ता है, न की अमृत। 

QUOTES #4
बिगडैल गाय सौ कुत्तों से भी ज्यादा श्रेष्ठ है अर्थात एक विपरीत स्वभाव का परम हितैषी व्यक्ति, उन सौ से श्रेष्ठ है जो आपकी चापलूसी करते हैं|

QUOTES #5
शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें। 

QUOTES #6
सिंह भूखा होने पर भी तिनका नहीं खाता।

QUOTES #7
एक ही देश के दो शत्रु परस्पर मित्र होते है।

QUOTES #8
आपातकाल में स्नेह करने वाला व्यक्ति ही मित्र होता है।
 
QUOTES #9
मित्रों के संग्रह से बल प्राप्त होता है। जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य।

QUOTES #10
कल के मोर से आज का कबूतर भला अर्थात संतोष सब से बड़ा धन है।

QUOTES #11
विद्या ही निर्धन का धन है। विद्या को चोर भी चुरा नहीं सकता।

QUOTES #12
शत्रुओं के गुणों को भी ग्रहण करना चाहिए।

QUOTES #13
अपने स्थान पर बने रहने से ही मनुष्य पूजा जाता है।

QUOTES #14
किसी लक्ष्य की सिद्धि में कभी भी किसी भी शत्रु का साथ न करें।

QUOTES #15
आलसी का न वर्तमान है, और न ही भविष्य।

QUOTES #16
चंचल चित वाले के कार्य कभी समाप्त नहीं होते। पहले निश्चय करिए, फिर कार्य आरम्भ करिए।

QUOTES #17
भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है। अर्थ, धर्म और कर्म का आधार है। शत्रु दण्डनीति के ही योग्य है।

QUOTES #18
आग में घी नहीं डालनी चाहिए अर्थात क्रोधी व्यक्ति को अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए।

QUOTES #19
मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है। दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।

QUOTES #20
दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती अर्थात आवश्यकतानुसार साधन जुटाने चाहिए।

QUOTES #21
कठिन समय के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए।

QUOTES #22
सुख का आधार धर्म है। धर्म का आधार अर्थ अर्थात धन है। अर्थ का आधार राज्य है।

QUOTES #23
वृद्धजन की सेवा ही विनय का आधार है। वृद्ध सेवा अर्थात ज्ञानियों की सेवा से ही ज्ञान प्राप्त होता है।

QUOTES #24
ज्ञान से राजा अपनी आत्मा का परिष्कार करता है, सम्पादन करता है।

QUOTES #25
विचार अथवा मंत्रणा को गुप्त न रखने पर कार्य नष्ट हो जाता है। लापरवाही अथवा आलस्य से भेद खुल जाता है।

QUOTES #26
सभी मार्गों से मंत्रणा की रक्षा करनी चाहिए। मन्त्रणा की सम्पति से ही राज्य का विकास होता है।

QUOTES #27
मंत्रणा की गोपनीयता को सर्वोत्तम माना गया है। भविष्य के अन्धकार में छिपे कार्य के लिए श्रेष्ठ मंत्रणा दीपक के समान प्रकाश देने वाली है।

QUOTES #28
मंत्रणा के समय कर्तव्य पालन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। मंत्रणा रूप आँखों से शत्रु के छिद्रों अर्थात उसकी कमजोरियों को देखा-परखा जाता है।

QUOTES #29
आवाप अर्थात दूसरे राष्ट्र से संबंध नीति का परिपालन मंत्रिमंडल का कार्य है।

QUOTES #30
दुर्बल के साथ संधि न करे। ठंडा लोहा लोहे से नहीं जुड़ता।

इस लेख में इन सब सवालों के जवाब दिए गए हैं! 

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