Sparrow in Hindi – गौरैया चिड़िया के बारे में रोचक तथ्य

गौरैया चिड़िया पता नही आज कहाँ खो गई। इनके गायब होने का जिम्मेदार मोबाइल फोन, टॉवर, कीटनाशकों के इस्तेमाल आदि को ठहराया जा रहा है। बचपन में यह आसानी से 8-10 के झुंड में देखी जा सकती थी लेकिन अब तो दुर्लभ-सी हो गई है। आइए आपको इस गायब होती गौरैया पक्षी का जानकारी से अवगत कराता हूँ…

1. हर साल 20 मार्च को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में “World Sparrow Day विश्व गौरैया दिवस” मनाया जाता है, इसकी शुरूआत 2010 में गौरैया की घटती आबादी को चिंताजनक मानकर की गई थी।

2. गौरैया संरक्षण व गौरैया बचाओ अभियान को सपोर्ट करते हुए साल 2012 में घरेलू गौरैया को दिल्ली का और 2013 में बिहार का राजकीय पंछी भी घोषित किया गया।

3. गौरैया एक बहुत छोटी पक्षी है। औसतन इसकी लंबाई 16 सेमी (6.3 इंच) और वजन 24 से 40 ग्राम होता है।

4. वैज्ञानिकों के मुताबिक गौरैयों की लगभग 43 प्रजातियां मौजूद हैं। पिछले कुछ सालों में इसकी संख्या में 60 से 80 फीसदी की कमी आई है।

5. नर और मादा गौरैया को उनके रंग के आधार पर पहचाना जा सकता है:- नर गौरैया की पीठ तंबाकू रंग की और गर्दन पर काली पट्टी होती हैं, जबकि मादाओं की पीठ और पट्टियाँ दोनों भूरे रंग की होती हैं।

6. गौरैया आमतौर पर 38 किमी प्रति घंटे की गति से उड़ते हैं।  लेकिन खतरे के समय, वे प्रति घंटे 50 किमी की तेज़ गति से भी उड़ सकते हैं।

7. गौरैया का भोजन : गौरैया प्राकृतिक रूप से मांसाहारी होते हैं, लेकिन जब से ये लोगों के करीब रहने लगे तो अपनी आदतों को बदल दिया है। गौरैया चिड़िया का खाना मुख्य रूप से पतंगे और अन्य छोटे कीड़े हैं, लेकिन ये बीज, जामुन और फल भी खा सकते हैं।

8. 1950 के दशक के अंत मे, चीन की सरकार ने लाखों गौरैयों को मारने का अभियान शुरू किया, क्योंकि गौरैये फसल खा जाया करते थे लेकिन इस अभियान के खत्म होते ही नतीजे इसके उल्टे आये क्योंकि लाखो गौरैयों को मारने के बाद चीन में फसल खाने वाले कीड़ो की संख्या में बहुत वृद्धि हो गयी और इस कारण हालात अकाल जैसे हो गए थे।

9. गौरैया के बहुत कम अंडों में माता-पिता दोनों का डीएनए होता हैं। ज्यादातर में केवल उनके माँ का डीएनए होता हैं।

10. गौरैया का घोंसला बनाने की ज़िम्मेदारी नर गौरैयों की होती हैं और घोंसला बनाते समय वे मादा गौरैयों को आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।

11. औसतन एक मादा गौरैया हर साल 3 से 5 अंडे देती है। 12 से 15 दिनों के बाद अंडे में से एक गौरैया का जन्म होता हैं। नर और मादा दोनों मिल के अंडे और अपने बच्चे का ख्याल रखते हैं। अपने जन्म के 15 दिन बाद ही एक गौरैया इतना काबिल हो जाता है कि वह अपनी घोंसला छोड़ सकें।

12. जंगली गौरैया औसतन 4 से 5 साल तक जीवित रह सकते हैं। लेकिन, डेनमार्क में एक जंगली गौरैया 19 साल और 9 महीने तक जीवित रहा था, जंगली गौरैया के लिए यह एक वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं। पिंजरे में कैद करके पाले जाने वाले गौरैया औसतन 12 से 14 साल तक जीवित रहते है। लेकिन, एक गौरैया का रिकॉर्ड 23 साल तक जीवित रहने का हैं।

13. अधिकांश गौरैया सुस्त होते हैं, वो शायद ही कभी अपने जन्मस्थान से 2 किलोमीटर (1.2 मील) से दूर उड़ते हैं।

14. भले ही इनकी गिणती पानी के पक्षियों में नही होती, लेकिन फिर भी इनमें तैरने की क्षमता होती हैं। एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए ये पानी के अंदर ही अंदर तैरते हैं।

15. गौरैया की आँख के रेटिना में प्रति वर्ग मिलीमीटर 4 लाख फोटोरिससेप्टर होते है।

16. गौरैया जब दु:खी होते है तो अपने तनाव को कम करने के लिए अपने पूँछ को बार-बार झटकते हैं।

17. आमतौर पर गौरैया जमीन पर सीधे चलने की बजाए उछलते हुए चलते हैं।

18. बिल्लियाँ, कुत्ते, सांप, लोमड़ी.. आदि जानवर ही अधिकत्तर गौरैया का शिकार करते हैं। इन्ही कुछ जानवरों से गौरैया को खतरा होता हैं।

19. गौरैया की घटती आबादी का एक बड़ा कारण मोबाइल टॉवर से निकलने वाली रेडिएशन है क्योंकि आमतौर पर 12 से 15 दिनों तक अंडे सेने के बाद गौरैया के बच्चे निकल आते हैं लेकिन मोबाइल टॉवर्स के पास 30 दिन सेने के बावजूद भी अंडा नहीं फूटता।
गौरैया कितनी ऊंचाई तक उड़ सकती है ?

गौरैया की कुछ प्रजातियां पहाड़ी इलाकों में लगभग 3300 फ़ीट की ऊँचाई पर रहती हैं और गौरैया लगभग 10-12 हजार फीट की ऊँचाई तक उड़ सकता हैं। एक रिसर्च के तौर पर वैज्ञानिकों ने एक प्रशिक्षित गौरैये को 20 हजार फीट की ऊँचाई पे ले जाकर छोड़ दिया। हैरानी थी कि वो गौरैया 20 हजार फीट की ऊँचाई पर भी उड़ रहा था। लेकिन इतनी ऊंचाई पर उसकी साँस लेने की गति दोगुनी हो गयी थी और उसके शरीर का तापमान 2°C तक कम हो गया था। बाकी कुछ खास फर्क नही पड़ा।
गौरैया को भारत के अलग-अलग राज्यों में, अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग नाम से जाना जाता है:

इस chidiya का वैज्ञानिक नाम है पासर डोमेस्टिकस. इसे ऊर्दू में चिरैया, सिंधी में झिरकी, पंजाब में चिरी, जम्मू और कश्मीर में चेर, पश्चिम बंगाल में चराई पाखी, उड़ीसा में घराछतिया, गुजरात में चकली, महाराष्ट्र में चिमनी, तेलुगु में पिछुका, कन्नड़ में गुबाच्ची, तमिलनाडु और केरल में कुरूवी के नाम से जाना जाता है।

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