हिटलर आखिर क्यों यहूदियों से नफ़रत करता था?

 

घृणा व्यक्ति की मानसिकता पर निर्भर करती है,हिटलर के यहूदियो से नफरत करने के निजी और सामाजिक कारण थे।

हिटलर यहूदियो को बाहरी मानता था ,उसका मानना था कि यहूदी जर्मनी में बाहर से आकर बसे हैं ,इस कारण हिटलर को यहूदियों की जर्मनी के प्रति निष्ठा पर संदेह था।

हिटलर तथा यूरोप में Anti Semitism की भावना थी।इसी नस्लीय सोच के कारण हिटलर यहूदियों से घृणा करता था।वह जर्मन लोगों को शुद्ध आर्यन नस्ल का मानता था ,तथा यहूदियों को निम्न समझता था।

एक कारण यह था कि जब जर्मनी में प्रथम विश्व युद्ध के बाद आर्थिक मंदी छाई हुई थी तब जर्मन लोग आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहे ,लेकिन ऐसे कठिन समय में यहूदी समुदाय कोई खास असर नहीं पड़ा ,क्योकि यहूदी समुदाय धनी था,ऐसे कठिन समय में यहूदियों के उच्च जीवन स्तर को देख हिटलर के मन में ईर्ष्या की भावना उत्पन्न हुई।

हिटलर प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार के लिए यहूदियों को भी कारण समझता था,उसका मानना था कि यहूदी समुदाय के बाहरी देशों से भी संपर्क है,तथा यहूदियों का झुकाव कम्युनिज्म की तरफ है।

निजी कारणों की अगर बात की जाए तो हिटलर आर्ट कॉलेज में एडमिशन लेना चाहता था,जहाँ उसे रिजेक्शन का सामना करना पड़ा।जिस कमेटी ने उसे रिजेक्ट किया उस कमेटी में यहूदी लोग थे,यह भी एक कारण था।

इन सबसे हटकर ये हिटलर का एक राजनीतिक एजेण्डा भी था ,वह यहूदियों के प्रति घृणा की भावना पैदा कर ध्रुवीकरण की राजनीति कर सत्ता में बने रहना चाहता था।

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